शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

एलियंस आ गए तो

युवावस्था  15  से  35  वर्ष  की  मानी  जाती  है।  यद्यपि  हमारे  बाल  20  में  ही  पक  गए  थे  और  अब  तो  साँस  भी  फूलने  लगी  है।  कमरदर्द  तो  महीने  में  दो  दर्दनिवारक  ट्यूब  का  व्यय  करा  ही  देता  है  पर  जब  हमने  एक  बार  पढ़  लिया  कि  35  वर्ष  तक  व्यक्ति  युवा  रहता  है  तो  उससे  पहले  स्वयं  को  अधेड़  मानने  का  प्रश्न  ही  नहीं  उठता।  इसलिए  अभिनेत्रियों  के  नए – नए  वीडियो  हम  यूट्यूब  पर  खोजते  रहते  हैं।  पिछले  रविवार  की  सुबह  भी  हमने  लैपटॉप  पर  यूट्यूब  खोला  और  सोचा  कि  आज  आलिया  भट्ट  का  वीडियो  देखेंगे।  इसलिए  टाइप  किया  Alia  Bhatt  in  March,  पर  इतने  में  ही  हमारी  धर्मपत्नी  कमरे  में    गयीं  और  घबराहट  में  हमसे  आलिया  की  बजाय  एलियन  टाइप  हो  गया।  अब  जो  वीडियो  खुला  उसका  पहला  ही  संवाद  था  कि  मार्च  में  तबाही  आने  वाली  है।  तबाही  शब्द  सुनते  ही  एकबारगी  हमें  लगा  कि  अगली  फिल्म  में  आलिया  वास्तव  में  अभिनय  करने  वाली  हैं  पर  तभी  भाँति – भाँति  की  उड़नतश्तरियों  और  गंजे  सिर  के  तीन  ऊँगलियों  वाले  हाथ  रखने  वालों  के  फोटो  आने  लगे  तो  पूर्ण  विश्वास  हो  गया  कि  आलिया  के  वास्तविक  अभिनय  जितनी  बड़ी  तबाही  नहीं  आने  वाली।  
खैर  अच्छी  बात  ये  रही  कि  पत्नी  के  सामने  ये  बात  खुलने  से  रह  गयी  कि  हम  आलिया  का  वीडियो  देख  रहे  थे।  इसलिए  हमने  वो  वीडियो  चलने  दिया।  वीडियो  में  बताया  गया  कि  एलियंस  मार्च  में  कभी  भी    सकते  हैं  और  फिर  वो  धरती  पर  सभी  मानवों  को  अपना  गुलाम  बना  लेंगे।  ये  एक  चिंताजनक  बात  थी।  पर  महिला  होने  के  नाते  धर्मपत्नी  जी  ने  हमसे  अधिक  चिंताग्रस्त  मुद्रा  में  कहा – ऐ!  जी  आपको  क्या  लग  रहा  है?  मार्च  के  शुरू  में  आएँगे  कि  अंत  में?
मैंने  वीडियो  को  पॉज  किया  और  कहा – पता  नहीं  इन  वैज्ञानिकों  का,  जिस  दिन  बारिश  होने  का  ऐलान  करते  हैं  उसके  दो  दिन  बाद  ही  होती  है  मुझे  तो  लगता  है  कि  अप्रैल  से  पहले    आने  के।
धर्मपत्नी  ने  कहा – पर    तो  रहे  हैं    सबसे  बुरी  खबर  तो  यही  है।  ऐसा  है  जी  की  दुनिया  तो  होने  वाली  है  खत्म।  अब  आप  मेरी  वो  इच्छाएँ  पूरी  कर  दीजिए  जिन्हें  आप  कभी  अगला  वेतन  मिलने  तो  कभी  अगला  बोनस  मिलने  के  नाम  पर  टाल  देते  हैं।  वर्ना  मेरी  आत्मा  तो  मरने  के  बाद  भटकेगी।  मैं  कागज  लाती  हूँ  इच्छाएँ  लिखने  को।
मन  में  तो  आया  कि  कह  दूँ  कि  जब  दुनिया  ही  खत्म  हो  जाएगी  तो  तुम्हारी  आत्मा  भटककर  किसे  परेशान  कर  लेगी?  पर  तार्किक  बातें  वो  भी  पत्नी  से  करने  की  हिम्मत  नहीं  की।  मैंने  कहा – पर  अगर  एलियन    आए  तो  या  आए  और  हमसे  हार  गए  तो  या  आए  और  नेताओं  ने  उन्हें  अपनी  तरह  भ्रष्ट  बनाकर  उन्हें  पैसे  से  खरीद  लिया  तो  या  कॉलोनी  के  सचिव  शर्मा  जी  ने  चंदा  करके  उन्हें  पैसे  दे  दिए  कि  हमारी  कॉलोनी  को  बख्शकर  कहीं  और  तबाही  करो  तब  तो  हम  लोग  बच  जाएँगे  और  ये  फिजूलखर्ची  से  बैंकबैलेंस  कम    हो  जाएगा?
अपना  पक्ष  हमने  उतनी  ही  मजबूती  से  रखा  जितनी  मजबूती  से  आत्मसमर्पण  करने  वाले  डाकू  का  पक्ष  उसका  अधिवक्ता  रखता  है  अब  तक  धर्मपत्नी  एक  कागज  कलम  लेकर  मेरे  पास  बैठ  चुकी  थी।  उसने  कहा – फिजूलखर्ची  होगी  आपके  लिए  मेरे  लिए  तो  जरूरतें  की  चीजें  हैं।  पिछली  सप्ताह  मॉल  में  मुझे  एक  588  की  लिपिस्टिक  पसंद  आयी  थी  वो  तो  चाहिए  ही  चाहिए।
मैंने  कहा – पर  पिछले  वेतन  से  ही  तो  200  की  लिपिस्टिक  दिलायी  थी।  अभी  तो  वही  आधी  बची  होगी।
धर्मपत्नी  ने  कहा – लिपिस्टिक  तो  आधी  बची  है  पर  जिंदगी  तो  आधी  भी  नहीं  बची।  आधी  क्या  आधे  महीने  की  भी  नहीं  बची।  अब  सब  इच्छाएँ  तो  अभी  पूरी  करनी  हैं  न।  इसलिए  मुझसे  बहस  मत  कीजिए  और  लिखिए  कागज  पर।
धर्मपत्नी  की  लिपिस्टिक  की  माँग  की  तीव्रता  ने  मेरे  लिप्स  पर  मानो  फेवीस्टिक  लगा  दी  थी  और  मैंने  कागज  पर  पहली  माँग  उतार  ही  दी।  माँगों  की  बोहनी  होने  की  प्रसन्नता  का  भाव  धर्मपत्नी  के  मुख  पर    गया।  पत्नीश्री  ने  एलियंस  के  आने  के  पॉज  करे  हुए  वीडियो  को  प्ले  किया।  वीडियो  में  बताया  गया  कि  एलियंस  आएँगे  तो  संसार  में  बस  एक  ही  धर्म  रह  जाएगा  जिसका  पालन  एलियंस  अनिवार्य  रूप  से  करवाएँगे। 
पत्नीश्री  ने  वीडियो  पुन: पॉज  किया  और  धर्मपत्नी  जी  ने  दूसरी  माँग  रखी – सुनिए जी,  पिछले  तीन  साल  से  आप  जागरण  टाल  रहे  हैं।  इस  बार  तो  जागरण  कराना  ही  पड़ेगा।
आलस  का  भाव  मुझमें  इतना रहता  है  कि  दिन  में  दो  घण्टे  सोए  बिना  रात  को  नींद नहीं  आती,  तो  ये  जागरण  में  कौन  जगेगा।  मैंने  कहा – अरी!  भाग्यवान  जागरण  कराकर  क्या  करोगी?  वैसे  ही  मुनिया  जिस  दिन  रात  में  उठ  जाती  है  उस  रात  नींद  टूटने  से  जागरण  हो  जाता  है।  ऊपर  से  कुछ  ही  रातें  रह  गयी  हैं  जब  हम  लोग  चैन  की  नींद  सो  सकते  हैं  तो  जागरण  कराकर  एक  रात  क्यों  खराब  करवा  रही  हो?
धर्मपत्नी  ने  कहा – देखिए  जी,  मैंने  तीन  महीने  पहले  आपके  साथ  वो  बनारसी  साड़ी  खरीदी  थी  उसे  आज  तक  पहनने  का  मौका  नहीं  लगा  है।  वो  पड़ोस  की  सुशीला  को  देखिए  कोसा  सिल्क  की  ही  साड़ी  लायी  थी  और  तीसरे  दिन  ही  कथा  का  बुलावा  देकर  सबको  साड़ी  दिखा  दी।  एक  मैं  हूँ  जो  तीन  महीने  से  इंतजार  कर  रही  हूँ।  ऊपर  से  एलियंस  अपना  धर्म  लागू  कर  देंगे  तब  तो  जागरण  हो  ही  नहीं  पाएँगे।  इसलिए  अबकि  तो  जागरण  कराइए  ही  कराइए।
धर्मपत्नी  जी  के  जागरण  कराने  का  कारण  उतना  ही  विचित्र  था  जितनी  विचित्र  एलियंस  की  सूरत  होती  है।  पर  दोनों  पर  ही  टिप्पणी  व्यर्थ  होती  है।  अत:  मैंने  चुपचाप  पत्नी  की  ये  माँग  भी  नोट  कर  ली।  अब  पत्नी  ने  अपने  गाल  पर  हाथ  रखा  और  तर्जनी  ऊँगली  गति  की  अवस्था  में  थी।  ऐसी  मुद्रा  को  कुछ  मनोवैज्ञानिकों  ने  सोचने  की  मुद्रा  बताया  है  और  पत्नी  के  इसी  मुद्रा  में  आने  से  हमें  डर  लगता  है।  खैर  पत्नी  जी  इस  मुद्रा  में    ही  चुकी  थीं  और  वास्तव  में  कुछ  सोचकर  कहा – उटी  सही  रहेगा
मैंने  कहा – उटी?  पर  किसलिए?
धर्मपत्नी  ने  कहा – घूमने  के  लिए  और  किसलिए?  आखिर  इंसान  उटी  और  किसलिए  जाता  है?
मैंने  कहा – पर  उटी  तो  अपने  घर  से  बहुत  दूर  है,  वहाँ  जाकर  क्या  करोगी?  आगरा  चलो    वो  पास  में  है,  जाना  सस्ता  है  और  वहाँ  दुनिया  का  सातवाँ  आश्चर्य  भी  है – ताजमहल।
हमने  आश्चर्य  के  नाम  पर  पैसा  बचाने  का  एक  प्रयास  किया  जिसे  धर्मपत्नी  ने  ये  कहकर  असफल  किया – ओफ्फो,  मैंने  भी  कहाँ  मास्टर  से  शादी  कर  ली।  सब  के  सब  ओल्डफैशन  होते  हैं।  आपको  कुछ  पता  तो  है  नहीं  ताजमहल  में  कुँवारे  जोड़े  ज्यादा  जाते  हैं  और  हनीमून  के  लिए  लोग  उटी  जाते  हैं।  हमारा  हनीमून  तो  नहीं  है  पर  हम  शादीशुदा  हो  चुके  हैं  इसलिए  पहाड़  पर  ही  जाएँगे।  आप  उटी  लिखिए,  वो  भी  गाड़ा  करके  और  हाँ  ब्रेकेट  में  बर्फ़  में  खेलना  भी  लिख  लीजिएगा,  कहीं  कुछ  रह    जाए।
काँपते  हाथों  से  हमने  उटी  लिख  दिया।  उधर  पत्नी  ने  पुन:  पॉज  वीडियो  को  प्ले  किया।  वीडियो  में  बताया  गया  कि  जहाँ  पर  लोग  एलियंस  की  बातें  नहीं  मानेंगे  वहाँ  पर  एलियंस  बमवर्षा  करेंगे।  धर्मपत्नी  ने  ये  देखकर  वीडियो  पॉज  किया  और  कहा – अब  तो  अपनी  कॉलोनी  पर  बम  गिरेगा  ही  गिरेगा  ये  पड़ोस  वाली  गुप्ताइन  है    इसका  तो  रिकॉर्ड  है  कि  अपने  पति  तो  क्या  कभी  अपने  माँ – बाप  की  भी    सुनी  तो  एलियंस  की  क्या  सुनेगी  और  वो  सात  नम्बर  गली  वाली  प्रियंका  वो  तो  औरत  होकर  भी  ब्यूटी  पार्लर  वाली  तक  से  झगड़ा  कर  लेती  है  तो  एलियंस  की  क्या  सुनेगी।  देखिए  जी,  अपनी  कॉलोनी  पर  बम  गिरे  इससे  पहले  मेरी  बर्थडे  पार्टी  करा  दीजिए।  आपने  शादी  के  बाद  मेरा  एक  भी  बर्थडे  ठीक  से  नहीं  मनाया  और  पिछले  बर्थडे  को  तो  स्कूल  में  इंस्पेक्शन  के  नाम  पर  छुट्टी  भी  नहीं  ली  थी।
पत्नीश्री  की  माँगसूची  बढ़ती  ही  जा  रही  थी  और  बैंकबैलेंस  की  राशि  मुझे  घटते  हुए  दिखायी  दे  रही  थी  मैंने  कहा – ये  माँग  बिल्कुल  भी  नहीं  मानी  जाएगी।  बताओ  तो  तुम्हारा  जन्मदिन  होता  है  दिसम्बर  में।  तब  तक  दुनिया  वैसे  ही  समाप्त  हो  जाएगी  या  एलियंस  की  गुलाम  हो  जाएगी  तो  तुम्हारा  जन्मदिन  कैसे  धूमधाम  से  मनेगा?  
धर्मपत्नी  ने  कहा – अरे!  इसीलिए  तो  मैं  अभी  अपना  बर्थडे  मनाना  चाहती  हूँ।  क्योंकि  दिसम्बर  में  तो  मौका  मिलेगा  नहीं  बर्थडे  मनाने  का।  मैं  आज  ही  अपने  फेसबुक  प्रोफाइल  पर  अपनी  बर्थ  डेट  बदल  दूँगी।  आप  कोई  डेट  बता  दीजिएगा  जिस  दिन  आपको  छुट्टी  मिल  सके  उसी  दिन  बर्थडे  पार्टी  मना  लूँगी।
मैंने  कहा – छुट्टी  क्यों  खराब  करवा  रही  हो  जब  मनमर्जी  मना  रही  हो  तो  अगले  रविवार  को  मना  लेना।
धर्मपत्नी  जी  ने  कहा – हद  है  आपसे!  इस  जन्म  में  तो  सोलह  सोमवार  के  व्रत  सही  से  रखे  थे।  पर  पता  नहीं  पिछले  जन्म  के  कौन  से  कर्म  थे  जो  आप  जैसा  बेरोमांटिक  पति  मिला।  रविवार  को  बर्थडे  मनाएँगे  तो  लोगों  को  लगेगा  कि  आप  मुझसे  प्यार  नहीं  करते।  आप  मेरे  बर्थडे  के  लिए  छुट्टी  लेंगे  तो  मेरी  भी  कॉलोनी  में  साख  बढ़ेगी।  वैसे  भी  एलियंस  ने  छुट्टियाँ  खत्म  कर  दीं  तो  आपकी  बची  हुई  छुट्टियाँ  बेकार  ही  हो  जाएँगी।  इसलिए  बुधवार  को  जन्मदिन  मनाएँगे  उस  दिन  किसी  का  व्रत  भी  नहीं  होता।  इसे  भी  नोट  कीजिए  जी।
सिर  झुकाकर  हमने  ये  माँग  भी  लिख  ली।  फिर  वीडियो  को  पॉज,  प्ले  करने  का  खेल  चलता  रहा।  प्रत्येक  पॉज  के  बाद  पत्नीश्री  एक  नयी  माँग  रखती  थीं  जिसे  मजबूरनवश  हमें  लिखना  पड़ता।  कागज  भर  चुका  था  और  पत्नी  पुन:  प्ले  का  बटन  दबाने  जा  रही  थी  पर  हमने  रोकते  हुए  कहा – अरी!  भाग्यवान  मैं  इतनी  देर  से  तुम्हारी  इच्छाएँ  लिख  रहा  हूँ  अब  तनिक  साँस  तो  लो  और  दो  घूँट  पानी  तो  ले  आओ।
धर्मपत्नी  जी  ने  कहा – ठीक  है  जी  ला  रही  हूँ  पर  इस  कागज  पर  नीचे  एक  नोट  लिख  दीजिए  कि  मैं  हर  हाल  में  इन  माँगों  को  पूरा  करूँगा  और  अपने  हस्ताक्षर  कर  दीजिए।  फिर  इसे  मैं  लॉकर  में  रखकर  आपको  पानी  लाती  हूँ।  आपका  क्या  भरोसा  कल  को  मुकर  गए  तो।  
धर्मपत्नी  जी  के  वाक्य  को  पत्थर  की  लकीर  मानकर  हमने  हस्ताक्षर  करके  अपने  कल्पपुरूष  होने  पर  मोहर  लगायी।  धर्मपत्नी  जी  माँगसूची  को  लेकर  चली  गयीं  और  मैंने  राहत  की  साँस  ली।  15  सेकण्ड  के  बचे  उस  वीडियो  पर  प्ले  बटन  को  दबाया  और  क्या  सुनता  हूँ  एलियंस  के  आने  की  ऐसी  कई  अफवाहें  और  झूठे  वीडियो  यूट्यूब  पर  चल  रहे  हैं।  एलियंस  के  बारे  में  नासा  या  इसरो  ने  कोई  पुष्टि  नहीं  की  है।  अत:  ऐसी  अफवाहों  से  सावधान  रहें।
धत्त  तेरे  की’,  उफ्फ’,  हाय  रे!  अफसोस  प्रकट  करने  के  इतने  ही  शब्द  आते  थे  हमें।  मति  मारी  गयी  थी  हमारी  जो  अंत  के  15  सेकण्ड  का  वीडियो  प्ले  होने  से  पहले  ही  पत्नीश्री  को  यहाँ  से  हटा  दिया  था।  ऊपर  से  माँगसूची  पर  हस्ताक्षर  और  कर  दिए  थे।  अब  एलियंस  आएँ  या    आएँ  पर  पत्नी  की  माँगसूची  को  मना  करने  का  साहस  मुझमें  नहीं  था।  हम  अपना  सिर  पकड़कर  बैठे  थे  इतने  में  ही  पत्नी  पानी  ले  आयी  और  हमसे  पूछा – क्या  हुआ  जी,  अंत  के  15  सेकण्ड  में  क्या  था?
मैंने  कहा – बस  यही  कि  एलियंस  आने  से  पहले  ही  लोगों  के  बैंक  अकाउंट्स  खाली  कर  देंगे।      


लेखक
प्रांजल सक्सेना 
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रविवार, 14 जनवरी 2018

खिचड़ी का आविष्कार

कई वर्षों पहले एक बार,
दिन का नाम था रविवार।
पति-पत्नी की एक जोड़ी थी,
नोंकझोंक जिनमें थोड़ी थी।

अधिक था उनमें प्यार,
मीठी बातों का अम्बार।
सुबह पतिदेव ने ली अंगड़ाई,
पत्नी ने बढ़िया चाय पिलाई।

फिर नहाने को पानी किया गर्म,
निभाया अच्छी पत्नी का धर्म।
पति जब नहाकर निकल आए,
पत्नी ने बढ़िया पकौड़े खिलाए।

फिर पतिदेव ने समाचार-पत्र पकड़ा,
दोनों हाथों में उसे कसकर जकड़ा।
अगले तीन घंटे तक न खिसके,
रहे वो समाचार-पत्र से चिपके।

पत्नी निपटाती रही घर के काम,
मिला न एक पल भी आराम।
एक पल को जो कुर्सी पर टिकी,
पति ने तुरंत फरमाइश पटकी।

बोले अब नींद आ रही है ढेर सारी,
प्रियतमा बना दो पूड़ी और तरकारी।
पत्नी बोली मैं हूँ आपकी आज्ञाकारी,
लेकिन फ्रिज में नहीं है तरकारी।

पति बोले दोपहर तक कोहरा छाया है,
सूरज को भी बादलों ने छिपाया है।
ऐसे में तरकारी लेने तो न जाऊँगा,
छोड़ो पूड़ी, दाल-चावल ही खाऊँगा।

पत्नी बोली थोड़ी देर देखिए टीवी,
अभी खाना बनाकर लाती बीवी।
पति तुरंत ही गए कमरे के अंदर,
पत्नी ने रसोई में खोले कनस्तर।

दाल-चावल उसमें रखे थे पर्याप्त,
पर सिलेंडर होने वाला था समाप्त।
बन सकते थे चावल या फिर दाल,
क्या बनाएँ क्या न का था सवाल।

कोहरा, बादल और था थरथर जाड़ा,
सूरज निकले गुजर चुका था पखवाड़ा।
कैसे कहती पत्नी कि सिलेंडर लाना है,
वरना दाल-चावल को भूल जाना है।

इतनी ठंड में पति को कैसे भेजूँ बाजार,
काँप-काँप उनका हो जाएगा बँटाधार।
इस असमंजस से पाने के लिए मुक्ति,
धर्मपत्नी ने लगायी एक सुंदर युक्ति।

कच्ची दाल में कच्चे चावल मिलाए,
धोकर उसने तुरंत कुकर में चढ़ाए।
कुछ देर में एक लम्बी सी आई सीटी,
पति के पेट में चूहे करने लगे पीटी।

पत्नी ने मेज पर खिचड़ी लगायी,
साथ में अचार और दही भी लायी।
नया व्यंजन देखकर दिमाग ठनका,
और पति के मुख से स्वर खनका।

बोले न तो है चावल न ही है दाल,
दोनों को मिलाजुला ये क्या है बवाल।
पत्नी बोली सिलेंडर हो गया खाली,
इसलिए मैंने चावल-दाल मिला डाली।

एक बार ही कुकर था चढ़ सकता,
दाल-चावल में से कोई एक पकता।
इतनी ठंड में आप जो बाहर जाते,
अगले दो घण्टे तक कँपकँपाते।

इसलिए मैंने इन दोनों को मिलाया,
आपके लिए ये नया व्यंजन बनाया।
खाने से पहले धारणा मत बनाइए,
तनिक एक चम्मच तो चबाइए।

पेट में चूहे घमासान मचा रहे थे,
चावल देख पति ललचा रहे थे।
नुक्ताचीनी और नखरे छोड़कर,
खाया एक कौर चम्मच पकड़कर।

नये व्यंजन का नया स्वाद आया,
पत्नी का नवाचार बहुत भाया।
बोले अद्भुत संगम तुमने बनाया,
और मुझे ठण्ड से भी है बचाया।

तृप्त हूँ मैं ये नया व्यंजन खाकर,
और धन्य हूँ तुम-सी पत्नी पाकर।
पर एक बात तो बताओ प्रियतमा,
क्या नाम है इसका, क्या दूँ उपमा।

पत्नी बोली पहली बार इसे बनाया,
नाम इसका अभी कहाँ है रख पाया।
खिंच रही थी गैस दुविधा थी बड़ी,
इसलिए इसको बुलाएँगे खिचड़ी।

मित्रों इनके सामने जब समस्या हुई खड़ी,
न तो पति चिल्लाया न ही पत्नी लड़ी।
आपके समक्ष भी आए जब ऐसी घड़ी,
प्रेम से पकाइएगा कोई नयी खिचड़ी।

तो इस पूरी घटना का जो निकला सार,
उसे हम कह सकते हैं कुछ इस प्रकार।
कि पति-पत्नी में जब हो असीम प्यार,
तो हो जाता है खिचड़ी का आविष्कार।

रचनाकार
प्रांजल सक्सेना 
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शनिवार, 27 मई 2017

हाय! रे गर्मी

छुटकी गर्मी बोली अकड़कर,
अभी तो बड़की भी आएगी।
अभी तो हाय गर्मी बोला है,
वो हाय - हाय गर्मी बुलवाएगी।

कूलर तो फेल हो चुका है,
एसी भी फेल हो जाएगा।
टेबिल, सीलिंग फैन का जनाजा,
जल्द ही निकल जाएगा।

फ्रिज से बाहर निकलते ही,
पानी की ठंडक होगी गुल।
पसीने की गंगा - जमुना से,
मेकअप सारा जाएगा धुल।

शरबत पीना चाहें कोल्ड ड्रिंक,
राहत फिर भी नहीं मिलेगी।
जिस धूप को बुलाया था जाड़े में,
वो जून की दुपहरी में खिलेगी।

बरसात के भरोसे तो रहना मत,
वो तो कब्ज की शिकार है।
जरूरत पर न होती बूँदाबाँदी भी,
बिन जरूरत होती मूसलाधार है।

ज्यादा दुआ मत करना बारिश की,
वर्ना वो बाढ़ को लेकर आएगी।
निचले मकानों में रहने वालों के,
बर्तन, चप्पल आँगन में तैरवाएगी।

अभी तो बचुआ मई ही चल रही है,
जून का जलवे देखना बाकि है।
तुम्हारे शरीर का बहता हुआ पसीना,
बड़की गर्मी का खास साकी है।

मैं तो केवल ट्रेलर दिखा रही हूँ,
असली फ़िल्म तो आने वाली है।
मैं तो हूँ निरुपमा राय सी दुःखी माँ,
वो तो शादीशुदा बड़ी साली है।

आँधी का थप्पड़ खाकर मैं तो,
एक कोने में जाती हूँ दुबक।
पर बड़की को ये चोंचले पसंद नहीं,
ठंडी हवा को भी सिखा दे सबक।

ले आना कितने भी काले बादल,
वो गमस से और गर्मी बढ़ाएगी।
हो गयी जो हल्की - फुल्की बारिश,
तो उसकी लॉटरी लग जाएगी।

डाल - डालकर कूलर में ठंडा पानी,
और गटक - गटककर बर्फ ठंडी।
मेरा तो घोर बहिष्कार कर दिया है,
एसी का बटन दिखाए लाल झंडी।

पर बड़की के सामने एक न चलेगी,
वो आज की आधुनिक नारी है।
कूलर, एसी, फ्रिजवादी सोच पर,
उसकी अंगारी गर्माहट भारी है।

कल ही बड़की से मेरी बात हुई है,
सामान पैक करके वो लैंड करेगी।
लगा लेना एक कमरे में दो - दो एसी,
पर वो तुम्हारी एक भी न सुनेगी।

सोचोगे तुम इसे कैसे भगाएँ,
पर तुम्हारे कहे से वो न जाएगी।
तुम रोना चाहोगे ठंडी बर्फ के,
पर वो पसीने के आँसू रुलवाएगी।

जब काटे हैं जमकर पेड़ और जंगल,
तो फिर सजा भी तुम्हें भुगतनी है।
गर्मी के टोल टैक्स की पर्ची भी,
तुम्हारे नाम पर ही कटनी है।

नये पौधे के साथ सेल्फी खिंचवाकर,
अपने को पर्यावरण प्रेमी कहते हो।
फिर कभी उन पौधों की सुध न लेते,
इसीलिए घोर गर्मी को सहते हो।

सोशल मीडया पर पढ़ते हो मैसेज,
कभी उन पर अमल भी करो।
जब चाहते हो प्रकृति से लाभ,
तो धरती को हरियाली से भरो।

न होगा इस कविता को पढ़ने से कुछ,
जो मंथन करे बिना ताली बजायी।
ऐ! मानव सोचो प्रकृति के बारे में,
देखो दबे पाँव बड़की भी आयी।




रचनाकार
प्रांजल सक्सेना 
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